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Tuesday, August 27, 2019

Love quotes

एक लम्हा गुज़र गया,,,

एक लम्हा गुज़रता गया बातें ख़त्म न हुई,
वो पास आते गए हमारे सासें रुकती चली गई ।

हम कभी करते थे कोशिश उनसे बात करने की,
आज आलम ये है कि दिन जलते गए रातें सुलगती गई ।

वो हुए इतने मुतासिफ हमसे की लगा अंग प्रत्यंग एक हो गए,
लेकिन न जाने टूटी सासें कब एक हो गई,
हम तो एक हो ही गए थे आत्मायें भी एक हो गई ।


Sunday, March 3, 2019

वीरता की कविता

                                    पाक की कायरता,,,,,,,,,

पाक पाक करता है बहुत तू, नापाक किसी दिन हो जाएगा,
जिस कायरता से वार किया है, तू खाक किसी दिन हो जाएगा,
कौन सी बहादुरी कर दी तूने कायरता से भारत में घुसकर,
अरे! भूल गया कारगिल का युद्ध ज्यों नाक रगड़ दी थी तेरी भारत ने ज़मीं पर,
बहुत सुलह की बात चीत से पर नहीं समझ तेरे आई 
जब जब कर गर मुलाकात हर मुलाकात तूने ठुकराई
आतंकियों को आतंकी की ही भाषा में समझाना होगा
पाकिस्तान की आवाम से आतंक को जड़ से मिटाना होगा
कार्यवाही कर तू आतंकियों पर नहीं स्ट्राइक हम ऐसे ही करते जाएंगे,
आज किया है एयरक्राफ्ट से कल थल सेना ले पहुंच जाएंगे
वन्देमातरम् की हुंकार से तेरा एक एक अतांकी मिट जाएगा,
जिस कायरता से वार किया है, तू खाक तो अब तो हो जाएगा,
।। जय हिन्द ।।
वंदेमातरम्!!!

Monday, February 11, 2019

वादा है हम सफर से,,,,,

वादा किसी का मोहताज नहीं होता
जरूरत होती है तो सिर्फ उसे निभाने की,
वरना नायक नायिका के बीच वो अपनी उपस्थिति ख़ुद ब ख़ुद दे देता है ।

हम तो उनके साथ सात जनम की गाड़ी पर बैठकर निकले थे मगर उन्होंने तो वादा हर जनम का ले लिया ।

Saturday, February 2, 2019

Broken heart

जब दिल उदास हो तो साहब, अकेले किसी कोने में रो लेना ,
समाज में अपना दर्द बतलाने जाओगे न तो लोग तुम्हारा मज़ाक बना देंगे ।

Friday, February 1, 2019

भक्ति के बिना आत्मा रेगिस्तान होगी.......

परमात्म के चरणों में अगर तू पड़ा रहेगा 
तो समझ लेना दुनियां तेरी गुलिस्तां होगी,,,,किन्तु अगर 
नास्तिकता में पड़ा रहकर भले ही तू संसार में घूमता रहे
मगर याद रखना ! "भक्ति के बिना आत्मा रेगिस्तान होगी"

Thursday, January 31, 2019

मेरी क़दर न की थी उसने,,,,,,,,,,

मैं मोहब्ब्त कि गलियों से गुज़रता था रोज़,
क्या कभी देखा था उसने। 
मैं भटकती उस रूह से मिलता था रोज़,
क्या कभी महसूस किया था उसने। 
इन हवाओं,अंबरों और इन चहकते बादलों को
सुनाता था अपनी दास्तां हर रोज़,
क्या कभी सुना था उसने।
मैं उसे काग़ज़ और ख़ुद कलम बन
पंक्तियों को करता था अंकित रोज़,
क्या कभी पढ़ा था उसने।
लेकिन बस कमबख्त एक ही गलती हुई मुझसे की
इस दिल को मैंने उसके हाथों में रख दिया था,

  • जिसकी क़दर ना की थी उसने।

Monday, January 28, 2019

Philosophy thoughts;


आत्मा क्यों अमर है? क्या कभी इस पर विचार किया आपने। तो चलिए मैं आपको बतलाता हूं।
जैसे कि आप सभी जानते ही है कि आत्मा अमर है और उसे कोई मार नहीं सकता। भगवान कृष्ण जी ने भी  गीता में कहा है "नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः । न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारूतः ।।" यानी आत्मा को कोई मार नहीं सकता, काट नहीं सकता, जला नहीं सकता।
 तो ऐसा क्यों है ? जानिए,,,,,
दर्शकों आत्मा के शब्द के पहले एक प्रत्यय लगता है "प्र" यानी परमात्मा हुआ। ये आत्मा परमात्मा का एक अंश है 
जिसे नष्ट नहीं किया जा सकता उसी प्रकार आप का संपर्क भी परमात्म से सदैव जुड़ा रहता है किन्तु आप उस की अनुभूति नहीं कर पाते क्योंकि आपका मोह परमात्म से न होकर सांसारिक भोग से जुड़ा होता है जिससे उनके बारे में आप सुन तो लेते हो पर महसूस नहीं कर पाते। और अगर आपको परमात्म की अनुभूती करनी हो तो इसके तो कई रास्ते होते है जैसे योग द्वारा,मंत्र द्वारा,तंत्र द्वारा,आदि आदि रास्ते हैं। इन्हीं रास्तों में से एक अभिन्न अंग है जिसे हम योग प्राणायाम के नाम से जानते है और योग का ही एक विशेष भाग है जिसे हम कुंण्डलनी योग के नाम से जानते हैं जिसके माध्यम से हम अपनी कुंण्डलनी जाग्रत कर हम अपने इष्ट को देख सकते ,उनकी अनुभूति कर सकते है और यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे करने के लिए एक मार्ग दर्शन की आवश्यकता अवश्य होनी चाहिए क्योंकि इस प्रक्रिया में सावधानी बहुत महत्वपूर्ण है किन्तु अपनी कुंडलिनी को जगृत करना हर मानव का धर्म भी होना चाहिए ताकि जिसके माध्यम से आपका साक्षात्कार परमात्म से हो सके और आप परमात्म में पुनः विलीन हो जाएं । इस प्रक्रिया को मैं अगले लेख में बतलाऊंगा ।
                          ।।हर हर महादेव।।


अब कुछ नहीं कहना


हर दिन नया हो, हर कोशिश नई हो, 
हर फैसला नया हो, हर उमंग नई हो,
मोड़ को तुम ऐसा चुनो, की हर राह नई हो,
इतनी गहराई में मत जाओ की तुम ऊंचाई को न छू पाओ,
उड़ान कुछ ऐसी भरो, की हर ऊंचाई नई हो,
सब कुछ नया पाने के लिए,
अपने कर्म पर सदैव अडिग रहना,
मेरी कविता ने ज़िन्दगी का हर किस्सा बयां कर दिया,
इससे ज्यादा मुझे "अब कुछ भी नहीं कहना" ।

Wednesday, January 23, 2019

Sardar Bhagat Singh...ke Alfaaz,,,,,,


             पनी एक लौती ज़िंदगी को लगा दूंगा भारत 
             कि आजादी में ऐसा ना सोचा था मैंने ।।
             मेरे जीवन के खत्म हो जाने के बाद कौन   
             रोएगा,कौन हंसेगा,कौन खुशी मनाएगा, 
             कौन मनाएगा शोक,
             कभी इन सबका विचार ना किया था मैंने ।। 
             फिर जब आयी तारीख 23 मार्च की...
             खामोशी सी छा गई, छा गया सन्नाटा हर तरफ 
             लोग इस कदर से याद करेंगे मुझे 
             इसकी कल्पना ना की थी मैंने...
             ना की थी मैंने....         
                                                       भारत माता की🙏

             

Monday, January 21, 2019

कोशिश कीजिए,,,,

                            कोशिश कर,,,,, 


हिम्मत रख कर कोशिश तू , लक्ष्य तेरे सामने है,
न हो निराश,न डर तू जीवन से, ईश्वर तेरे जो साथ में है,
फल कर्म का मिलेगा जरूर, सुबह नहीं तो रात में है ।
हिम्मत रख कर कोशिश तू,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Sunday, January 20, 2019

सब कुछ उसका था,,,

मंजिल भी उसकी थी,रास्ता भी उसका था,
एक हम ही अकेले थे,काफिला भी उसका था ।

साथ चलने की सोच भी उसकी थी फिर,
रास्ता बदलने का फैसला भी उसका था ।

आज अकेला हूं मैं,,,, और दिल सवाल करता है 
कि सब कुछ उसकी ही थी,क्या भगवान भी उसका था ।



Saturday, January 19, 2019

सिखाया ज़िन्दगी ने,,,,,,

हर कठिन राह पर तीव्रता से आगे बढ़नासिखाया था इस ज़िन्दगी ने,भले ही छूटते जाएं मेरे अपने,न हो सुध खाने पीने की लेकिन मेरे लक्ष्य पर मुझे दृढ़ संकल्प रहना,सिखाया था इस ज़िन्दगी ने,कोशिश भी कर लूं मै ना चुका पाऊंगा कर्ज इस ज़िन्दगी का,हर उस कठिन मोड़ पर, डट के खड़ा रहनासिखाया था इस ज़िन्दगी ने।

                                              स्वरचित कविता,,,,,,,😇


Friday, January 18, 2019

समय के साथ चलना था,,,


रुक-रुक के भी ठहरना था 
दौड़-दौड़ के भी चलना था 
उम्र की घटा भी ऐसे छाई 
की जवानी को बचपन में बदलना था
अरे!साहब हम तो घड़ी की सुइयों को ही घुमाना जानते थे
मुझे क्या पता था कि "समय के साथ भी चलना था"

कटी पतंग ज़िन्दगी की,,,,,

कटी पतंग ज़िन्दगी की,,,,,


ये कारवां ज़िन्दगी का ख़त्म होगा तब 
जब आस दुनिया से रुकसत हो जाएगी
ये ज़िन्दगी की पतंग उड़ती रहेगी तब तक
जब तक सांसों की डोर जुड़ती जाएगी 
मै चला भी जाऊं अगर मौत के मांझे से कटकर
तो क्या हुआ????
कवितग्यता मुझे लोगो में मुकम्मल कर जाएगी।


Love quotes

एक लम्हा गुज़र गया,,, एक लम्हा गुज़रता गया बातें ख़त्म न हुई, वो  पास आते गए हमारे सासें रुकती चली गई । हम कभी करते थे कोशिश उनसे ...